भीड़ किसी का नहीं होता। हम लोग हर हाल में कोई अपना चाहते हैं जो मान रखे, ख्याल रखे, प्यार करे। आदमी को अगर पेट भरा हो तो फिर प्यार करनेवाले को खोजता रहता है। यह प्रयास अनवरत चलता रहता है- एक सच्चे मित्र की तलाश। कुछ हद तक फेसबुक यह कमी पूरा कर रहा है। आभासी ही सही दो पल का सुख -दुःख तो शेयर कर ही रहे हैं हम मित्र समझकर।

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