Tuesday, 16 December 2014

यह जरूरी नहीं है कि गुरु कोई व्यक्ति हो। 
गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है। गु और रु, ‘गु’ के मायने हैं अंधकार और ‘रु’ का मतलब है भगाने वाला। कोई भी चीज या इंसान, जो आपके अंधकार को मिटाने का काम करता है, वह आपका गुरु है। यह कोई ऐसा इंसान नहीं है जिससे आपको मिलना जरूरी हो। गुरु तो एक तरह की रिक्तता है, एक विशेष प्रकार की ऊर्जा है। यह जरूरी नहीं है कि गुरु कोई व्यक्ति हो। लेकिन आप एक गुरु के साथ, जो शरीर में मौजूद हो, खुद को बेहतर तरीके से जोड़ सकते हैं, आप अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं। एक सच्चा जिज्ञासु, एक ऐसा साधक जिसके दिल में गुरु को पाने की प्रबल इच्छा होती है, वह हमेशा उसे पा ही लेता है। इसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं है। जब भी कोई वास्तव में बुलाता है, याचना करता है तो अस्तित्व उसका उत्तर जरूर देता है।

No comments:

Post a Comment