Saturday, 22 November 2014

शुभ प्रभात !!!
लोक रीति- रिवाज समाज के बेहतरी के लिए होते हैं। परन्तु कई बार हम इन वर्जनाओं की वजह से उन्मुक्त हो नहीं पाते। मन में ख्याल आता है कि लोग क्या कहेंगें। इस चक्कर में आदमी या औरत कोई भी हो, मन मर्जी से जी नहीं पाते। कभी- कभी यह कुंठा का रूप ले लेता है।

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