Thursday, 6 November 2014

कबीर पढ़े-लिखे नहीं थे- मसि कागद छूवो नहीं, कलम गही नहिं हाथ। संत कबीर ने स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे, मुँह से भाखे और उनके शिष्यों ने उसे लिख लिया। लेकिन आजकल के ज़माने में एक्सपोजर चाहिए। क्यों ? यदि आपकी रचना का चिल्ला चिल्लाकर प्रसार नहीं हुआ तो बेकार गया समझो।

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