लघु कथा -
एक गाँव में एक मजदूर औरत रहती थी। एक दिन परेशान होकर वह अपने पति से बोली। एक तो हमारा दो वक्त का खाना पूरा नहीं होता है और ऊपर से हमारी बेटी साँप की तरह बड़ी होती जा रही है। गाँव के मनचले इसे बुरी नज़र से देखते हैं। अगर जल्दी ही इसकी शादी नहीं हुई तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। भगवान गरीबों को ही बेटी क्यों देता है ? गरीबी की हालत में हम इसकी शादी कैसे करेंगे ? बाप भी विचार में पड़ गया। बात सोलह आने सही था। कुछ दिन बाद गाँव के ही एक दबंग के बेटे द्वारा अपनी लड़की को बूरी नजर से घूरते हुए देखा, तो माँ-बाप बिफर गए। परन्तु कमजोरी वश कुछ कर नहीं सके।
दोनों ने दिल पर पत्थर रख कर एक फैसला लिया कि कल बेटी को मार कर जंगल में गाड़ देंगे। दुसरे दिन का सूरज निकला, माँ ने लड़की को खूब लाड - प्यार किया, अच्छे से नहलाया, बार - बार उसका सर चूमने लगी। यह सब देख कर लड़की बोली : माँ मुझे कहीं दूर भेज रहे हो क्या ? वर्ना आज तक आपने मुझे ऐसे कभी प्यार नहीं किया, माँ केवल चुप रही और रोने लगी।
तभी उसका बाप हाथ में फावड़ा और चाकू लेकर आया। माँ ने लड़की को सीने से लगाकर बाप के साथ रवाना कर दिया। रास्ते में चलते – चलते बाप के पैर में कांटा चुभ गया, बाप एक दम से निचे बैठ गया, बेटी से देखा नहीं गया। उसने तुरंत कांटा निकालकर फटी चुनरी का एक हिस्सा पैर पर बांध दिया। बाप बेटी दोनों एक जंगल में पहुंचे। बाप फावड़ा लेकर एक गड्ढा खोदने लगा। बेटी सामने बेठे - बेठे देख रही थी, थोड़ी देर बाद गर्मी के कारण बाप को पसीना आने लगा। बेटी बाप के पास गयी और पसीना पोछने के लिए अपनी चुनरी दी। बाप ने धक्का देकर बोला, 'तू दूर जाकर बैठ।' थोड़ी देर बाद बाप गड्ढा खोदते - खोदते थक गया।
बेटी दूर से बैठे - बैठे देख रही थी। जब उसको लगा कि पिताजी शायद थक गये तो पास आकर बोली -पिताजी आप थक गये है, लाओ फावड़ा दो मैं खोद देती हूँ गड्ढा, आप थोडा आराम कर लो। मुझसे आप की तकलीफ देखी नहीं जाती। यह सुनकर बाप ने अपनी बेटी को गले से लगा लिया। उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। उसका दिल पसीज गया। बाप बोला : ‘बेटा मुझे माफ़ कर दे, यह गड्ढा में तेरे लिए ही खोद रहा था और तू मेरी चिंता करती है, अब जो होगा सो होगा, तू हमेशा मेरे कलेजे का टुकड़ा बन कर रहेगी। में खूब मेहनत करूँगा और तेरी शादी धूम धाम से करूँगा।‘ !! आत्महत्या या हत्या एक कायरता है और कन्या की हत्या करना तो सबसे बड़ा पाप है। आज मैं यह बात समझ गया हूँ। सुख - दुःख तो अपना साथी है। संघर्ष ही जीवन है। – महेंद्र तिवारी
‘आत्महत्या या हत्या एक कायरता है’
एक गाँव में एक मजदूर औरत रहती थी। एक दिन परेशान होकर वह अपने पति से बोली। एक तो हमारा दो वक्त का खाना पूरा नहीं होता है और ऊपर से हमारी बेटी साँप की तरह बड़ी होती जा रही है। गाँव के मनचले इसे बुरी नज़र से देखते हैं। अगर जल्दी ही इसकी शादी नहीं हुई तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। भगवान गरीबों को ही बेटी क्यों देता है ? गरीबी की हालत में हम इसकी शादी कैसे करेंगे ? बाप भी विचार में पड़ गया। बात सोलह आने सही था। कुछ दिन बाद गाँव के ही एक दबंग के बेटे द्वारा अपनी लड़की को बूरी नजर से घूरते हुए देखा, तो माँ-बाप बिफर गए। परन्तु कमजोरी वश कुछ कर नहीं सके।
दोनों ने दिल पर पत्थर रख कर एक फैसला लिया कि कल बेटी को मार कर जंगल में गाड़ देंगे। दुसरे दिन का सूरज निकला, माँ ने लड़की को खूब लाड - प्यार किया, अच्छे से नहलाया, बार - बार उसका सर चूमने लगी। यह सब देख कर लड़की बोली : माँ मुझे कहीं दूर भेज रहे हो क्या ? वर्ना आज तक आपने मुझे ऐसे कभी प्यार नहीं किया, माँ केवल चुप रही और रोने लगी।
तभी उसका बाप हाथ में फावड़ा और चाकू लेकर आया। माँ ने लड़की को सीने से लगाकर बाप के साथ रवाना कर दिया। रास्ते में चलते – चलते बाप के पैर में कांटा चुभ गया, बाप एक दम से निचे बैठ गया, बेटी से देखा नहीं गया। उसने तुरंत कांटा निकालकर फटी चुनरी का एक हिस्सा पैर पर बांध दिया। बाप बेटी दोनों एक जंगल में पहुंचे। बाप फावड़ा लेकर एक गड्ढा खोदने लगा। बेटी सामने बेठे - बेठे देख रही थी, थोड़ी देर बाद गर्मी के कारण बाप को पसीना आने लगा। बेटी बाप के पास गयी और पसीना पोछने के लिए अपनी चुनरी दी। बाप ने धक्का देकर बोला, 'तू दूर जाकर बैठ।' थोड़ी देर बाद बाप गड्ढा खोदते - खोदते थक गया।
बेटी दूर से बैठे - बैठे देख रही थी। जब उसको लगा कि पिताजी शायद थक गये तो पास आकर बोली -पिताजी आप थक गये है, लाओ फावड़ा दो मैं खोद देती हूँ गड्ढा, आप थोडा आराम कर लो। मुझसे आप की तकलीफ देखी नहीं जाती। यह सुनकर बाप ने अपनी बेटी को गले से लगा लिया। उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। उसका दिल पसीज गया। बाप बोला : ‘बेटा मुझे माफ़ कर दे, यह गड्ढा में तेरे लिए ही खोद रहा था और तू मेरी चिंता करती है, अब जो होगा सो होगा, तू हमेशा मेरे कलेजे का टुकड़ा बन कर रहेगी। में खूब मेहनत करूँगा और तेरी शादी धूम धाम से करूँगा।‘ !! आत्महत्या या हत्या एक कायरता है और कन्या की हत्या करना तो सबसे बड़ा पाप है। आज मैं यह बात समझ गया हूँ। सुख - दुःख तो अपना साथी है। संघर्ष ही जीवन है। – महेंद्र तिवारी
No comments:
Post a Comment